माँ बगलामुखी – सम्पूर्ण जानकारी

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। उन्हें शत्रु नाश, वाणी स्तम्भन और विजय की देवी कहा जाता है। जो साधक न्याय, विजय और सुरक्षा की कामना करता है, वह माँ बगलामुखी की उपासना करता है। माँ बगलामुखी की उपासना विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो जीवन में विरोध, शत्रु बाधा, न्यायालय के मामले, राजनीति या व्यापार में संघर्ष का सामना कर रहे होते हैं। ऐसा माना जाता है कि माँ की कृपा से साधक की वाणी में प्रभाव बढ़ता है और शत्रुओं की नकारात्मक शक्ति स्वतः ही शांत हो जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है और इसे पूर्ण श्रद्धा, नियम और विधि के साथ करना चाहिए। माँ की कृपा से भय, असफलता और मानसिक अशांति दूर होती है तथा आत्मविश्वास और विजय प्राप्त होती है।

दस महाविद्याओं में स्थान

दस महाविद्याओं में काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला आती हैं। इनमें माँ बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति की देवी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार दस महाविद्याएँ देवी आदिशक्ति के दस भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं, जो सृष्टि के विभिन्न तत्वों और शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रत्येक महाविद्या का अपना विशेष महत्व, साधना मार्ग और आध्यात्मिक उद्देश्य है। माँ बगलामुखी इन महाविद्याओं में आठवें स्थान पर विराजमान हैं और उन्हें विशेष रूप से शत्रु बाधा निवारण तथा वाणी नियंत्रण की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। उनकी स्तम्भन शक्ति का अर्थ केवल शत्रु को रोकना ही नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा, अन्याय और विपरीत परिस्थितियों को स्थिर कर देना भी है। आध्यात्मिक दृष्टि से माँ बगलामुखी साधक को आत्मसंयम, धैर्य और मानसिक स्थिरता प्रदान करती हैं। उनकी साधना व्यक्ति को भीतर से सशक्त बनाती है और कठिन परिस्थितियों में भी विजय का मार्ग प्रशस्त करती है।

माँ बगलामुखी का स्वरूप

माँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। उनका वाहन सिंह है। वे शत्रु की जिह्वा पकड़कर उसे स्तम्भित करती हुई दिखाई देती हैं। यह प्रतीक है अन्याय और दुष्टता के नाश का।

माँ बगलामुखी मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।

माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा

नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में स्थित नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि यहाँ की साधना से अनेक साधकों ने सिद्धियाँ प्राप्त कीं। नलखेड़ा को तांत्रिक साधना का प्रमुख स्थान माना जाता है।

नलखेड़ा मंदिर का महत्व

पूजा और हवन विधि

माँ बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से पीले वस्त्र, हल्दी, और पीले पुष्पों से की जाती है। हवन में विशेष मंत्रों का जाप कर शत्रु बाधा निवारण किया जाता है।

नवरात्रि में विशेष आयोजन

नवरात्रि के समय नलखेड़ा मंदिर में विशेष पूजा और हवन का आयोजन होता है। इस समय हजारों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।


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